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Indian Modernism: आधुनिकता या फिर नकल करने का घातक प्रयास

खैर, शुरुआत मैंने हिंदी में की है तो आशा करता हूँ , यहाँ सभी पाठक भारत से संबंध रखते होंगे अथवा १ प्रतिशत ऐसे भी होंगे,जिन्हें सर्च इंजन ने यहाँ धकेल दिया होगा|


शीर्षक देखकर आपको पता चल ही गया होगा कि यहाँ आज आधुनिकता की बातें होनी हैं| जैसा कि महान इतिहासकार और राजनीतिज्ञ लोगों ने आधुनिकता को कभी बदलाव , कभी धन के ढेर , तो कभी अभियांत्रिकी सफलता (टेक्नोलॉजी) से अलग अलग मापदंडों में तौला है| आप लोगों ने भी कपड़ों के प्रकार, बोलचाल, रहन-सहन तो कभी संसाधनों की आपूर्ति के हिसाब से आधुनिकता को समझा है| मगर मेरे विचार थोड़े अलग हैं, मेरी दृष्टि में भारत की आधुनिकता की परिभाषा कुछ ऐसी है-

अधुनिकता एक ऐसी चुनौती है, जो साधारण मनुष्य को अपनी पसंद से ना जीने देने के लिए अक्रामित करती है, यह मजबूरी है एक लाचार इंसान की जो उसे समाज के बीच आदर सम्मान प्राप्त करने के लिए दिखावा करने को मजबूर करती है|

थोड़ी अटपटी लगी होगी यह परिभाषा| विश्वास मानिये मैं समाज का तुलनात्मक अध्ययन के अलावा कोई महान लेखक द्वारा रचित ज्ञानवर्धक पुस्तक नहीं पढ़ता| अपनी परिभाषा को अब मैं जोड़ना शुरू करता हूँ,

सबसे पहले बात करते हैं ,

रस्मों और अनुष्ठानों में आयी अधुनिकता की- पहले किसी समय में शादी-ब्याह का मतलब दो परिवारों का मिलन होता था , जिसमें रिश्ते नाते बनाये जाते थे और सभी रिश्तेदारों के लिए भोज का आयोजन किया जाता था| जिसकी जितनी क्षमता होती थी , उस हिसाब से धन व्यय होता था| मगर फिर दौर बदला और दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने के स्वर उभरना शुरू हुए और धीरे धीरे यह एक औपचारिकता बनी की लड़का वाला लड़की वाले से यह बोलेगा- ” हमें दहेज नहीं चाहिए बस लड़की गुणी और सुशील होनी चाहिए” और फिर लड़की वाला इस अहसान तले दबकर की उन्होंने कुछ नहीं मांगा, इस बदले में दहेज का सारा पैसा शादी के खाने और साज सजावट में लगाने लगा| जहाँ पहले कुछ सीमित खर्च में खाना हुआ करता था वहाँ आज एक शादी में सिर्फ खाने का खर्चा 10-20 तो कभी 50 लाख तक पहुंच जाता है| यह बदलाव वाकई अधुनिकता को प्रदर्शित करता है, अब कुछ लोग यह जरूर सोच रहे होंगे कि जब हमारे पास पैसा है तो हम खर्च करेंगे, इसमें तुम्हे क्या परेशानी? बात आपकी बिल्कुल सही है, मगर मेरे अमीर भाई , आपके आस पड़ौसी या फिर आपके कुछ रिश्तेदार जिनके पास शायद आपके जितना धन नहीं है , उन्हें अपनी साख बचाने के चक्कर में उधार लेकर उतना ही दिखावा करना पड़ता है तो मुझे दुख होता है| जहाँ एक तरफ आप खुशी का उत्सव मना रहे हैं वहाँ दूसरी तरफ आप कर्ज लेकर दिखावट कर रहे हैं, यह कैसी अधुनिकता है भई?

marraige

वहीं बात करते हैं,

युवा पीढ़ी की जिसे आधुनिक ट्रेंड का अनुसरण करने में बड़ा मजा आता है, कभी किसी अभिनेता को अनुसरित करते हैं तो कभी गायक को तो कभी विराट कोहली जैसे बल्लेबाज को, सबसे पहले मेरा सवाल आपसे यह है कि आप लोगों ने क्या सिर्फ उसके रहन सहन को अनुसरित किया है? उसके इस रहन सहन के पीछे छिपी अथक मेहनत और त्याग को कभी जीवन मे क्यों नहीं उतारते आप? अगर आपको पश्चिमी देशों से सीखना है तो पूरी तरह सीखिए ना, सिर्फ फैशन और रहन सहन से आप आधुनिक नहीं बन रहे| आप बन रहे हो नकलची बन्दर जो दूसरे को देखकर खुद को वैसा बनाने की कोशिश में है, जो वह पहले कभी था नहीं और अभी भी नहीं है| अगर इतना शौक है, इतना आधुनिक बनना है तो आप क्यों नहीं अपना खुद का फैशन स्टाइल बनाते , क्या सारे नए स्टाइल बनाने का ठेका अमेरिका और लंदन को मिला है| आप अपना खुद का कोई ट्रेंड नहीं चलवा सकते, या फिर आप भी उसी मानसिकता से घिरे हैं कि जो भी अधिक अमीर है सिर्फ वही सही हो सकता है| आप उन लोगों के डिज़ाइन किये फटे जीन्स पहनने में हिचकिचाते नहीं हो मगर वहीं किसी शादी में अगर कोई साधारण कपड़े पहन ले तो उसे आप गंवार समझ कर हीन नजरों से देखते हैं, क्योकि उसने ओल्ड फ़ैशन के कपड़े पहनने हैं| अंग्रेजी गाने सुनना या फिर अंग्रेजी बोलना आपके लिए अधुनिकता का परिचायक बना है, अगर कोई अंग्रेजी में फर्राटेदार बातें करता है तो सभी लोग उससे प्रभावित हो जाते हैं, यह अकेले युवा वर्ग की बात नहीं यह समस्या है , इंडस्ट्री , एक जॉब इंटरव्यू या फिर किसी चर्चा की| आप अपने देश की दुर्दशा का अंदाज़ा इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां की कोई मातृभाषा नहीं है, जैसे अमेरिका में अंग्रेजी, रूस में रूसी , चीन में चीनी और जापान में जापानी भाषा बोली जाती है और आधिकारिक गतिविधियों में सभी कार्य उसी भाषा में सम्पन्न होते हैं , मगर भारत एक ऐसा अभागा देश है, जहाँ अनेकता में एकता” के संदेश को देने के चक्कर में हिंदी, अंग्रेजी, बंगला , भोजपुरी सभी भाषाओं को बोला सुना जाता है, मगर इसे दुर्भाग्य कहें या फिर मजबूरी की आधिकारिक तौर पर सबसे अधिक अंग्रेजी को महत्व दिया जाता है| किसी भाषा को समझना और बोलना बहुत अच्छी बात है मगर इतना अधिक महत्व देना की अपनी पारंपरिक भाषा के विलुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो जाये तो यह दुर्भाग्यपूर्ण बात हो जाती है| एक देश जहाँ अधिक संख्या में लोग हिंदी समझ सकते हैं और बोल भी सकते हैं वहाँ के राष्ट्रपति को कुछ विशेष अवसर पर अंग्रेजी में भाषण देना पड़ता है, ऐसी भी क्या मजबूरी आ गयी थी , जब संविधान लिखा गया था तब मुझे नहीं लगता भारत में साक्षरता 50 प्रतिशत भी रही होगी| ऐसे में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का अंग्रेजी में भारत के लोगों के साथ संवाद करना बिल्कुल ऐसा रहा होगा जैसे आज आप चीनी भाषा को लेकर उपहास करते हैं| अंग्रेजी भाषा को ऐसे थोपा गया है कि आज भारतीय सिनेमा जहाँ लगभग सभी फिल्में हिंदी में बनती हैं वहाँ आज भी फ़िल्म की समीक्षा और अधिकतर साक्षात्कार अंग्रेजी में किये जाते हैं|

blog modern

खैर मेरी बातों से कुछ बदलने वाला नहीं है मगर मैं आप लोगों से यही निवेदन करूँगा की अधुनिकता अगर अपनानी है तो नकल करना बंद कर दीजिए|

 मेरे दृष्टिकोण में अधुनिकता के सही मायने-

  • जब गरीब अमीर जैसी खाई बीच में ना रहे, आपका कोई रिश्तेदार अथवा भाई जिसके पास धन का अभाव है , उसे आपकी दिखावट की वजह से अपमानित ना होना पड़े|
  • आप दोहरा बर्ताव बन्द करोएक तरफ आप अधुनिक वस्त्र पहनने की वकालत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक पुराने फैशन के वस्त्र पहने व्यक्ति का मजाक बनाते हैं, आखिर स्वतंत्रता तो सभी की समान है फिर आप किस बात का मजाक बना रहे हैं|
  • अंग्रेजी की नकल बन्द करें- जरूरी नहीं अंग्रेजी में बोली हर बात सही होती है, व्यक्तित्व को पहचानें उसकी भाषा या बोली को नहीं | नकल करने से अच्छा आप अपने देश की शैली को बढ़ावा दें| गायक और कलाकार भारत में भी कम प्रतिभाशाली नहीं है मगर आप एक आधुनिक सोच के चक्कर मे उन्हें अक्सर नकार देते हैं! आप खुद भी तो उनके स्तर को सुधारने का प्रयास कर सकते हैं, आप कुछ नया करके दिखायें|
  • शारीरिक जरूरत को अधुनिकता का नाम देकर फूहड़ता फैलाना बन्द कीजिये- आप अगर कहीं भी कुछ भी बोलकर खुद को आधुनिक समझने की भूल कर रहे हैं तो शायद आप गलत हैं, यह दुनिया सिर्फ और सिर्फ शरीरिक आनंद के लिए नहीं बनी , यहाँ कुछ बच्चे भी हैं जिन्हें कुछ करके दिखाना है, उन्हें जरूरत है, अच्छी शिक्षा और परवरिश की, कुछ बूढ़े भी हैं जो ज्ञान कर्म की बातें भी करना चाहते हैं| कुछ प्रौढ़ भी हैं जिन्हें जीवन का महत्व और कर्म निभाना है| ऐसे में अगर आप सार्वजनिक स्थान या फिर सोशल मीडिया पर सारा दिन शारीरिक आनंद संबंधित अथवा फूहड़ संदेश फैलाकर खुद को कूल समझ रहे हो तो शायद आप अधुनिकता को बहुत गलत दिशा में ले जा रहे हो|
  • शौक और संसाधन जुटाने के अलावा कुछ योगदान भी दीजिये- एक देश जिसको पूरा विश्व जगत गुरु बोलता था, आज इतना लाचार हो चुका है कि ज्ञान और शिक्षा के लिए उसे विदेश का मुंह देखना पड़ता है, इसका कारण परिस्थिति नहीं हैं, बल्कि हम खुद हैं| हमने अपना ध्यान योगदान करने से हटाकर सुख सुविधा और संसाधन जुटाने में लगा दिया| जरूरी नहीं कि, अगर कोई 24-25 साल का हो गया है तो उसे कमाना शुरू कर देना चाहिए या फिर घर बसा लेना चाहिए, जरूरी यह है कि उसे देश के लिए , उन्नति के लिए कुछ योगदान देना चाहिए| वह चाहे शिक्षा बाँटकर, सैन्य सेवा करके, समाज सेवा करके अथवा शोध कार्य करके देश की उन्नति में कुछ योगदान देना चाहिये| जैसा कि पश्चिमी सभ्यता के लोग करते आ रहे हैं, मगर हमने उनसे सिर्फ भोग विलास सीखा है , मेहनत लग्न और खोज शायद हम भूल गए हैं|research

 

अब मैं इन्ही शब्दों के साथ अपनी कलम को विराम देता हूँ| आप सभी अपने विचार कॉमेंट में जरूर दें ताकि मुझे पता चल सके कि आपका मत इस विषय में क्या है? अधुनिकता को आप किस दृष्टि से देख रहे हैं?

संक्षिप्त परिचय

नमस्कार मेरा नाम शुभांकर शर्मा है और मैं खाली समय मे ब्लॉगिंग करता हूँ, मेरा ब्लॉग Shubhankar Thinks  है|

#ShubhankarThinks

Thanks to all.

9 replies on “Indian Modernism: आधुनिकता या फिर नकल करने का घातक प्रयास”

The changes which are taking place around us (in India) is pretty wonderful. I truly admit that the growth and enhancement is pretty slow and in some fields, no growth at all, but trust me, people are working. Even I do. And one more thing, humans are fantasized by things which seem wonderful irrespective of the country and the culture. Because there is no country which is good at everything. I can’t say much about the culture because I haven’t deeply involved in it but yes, people want things which make them happy. An ultimate truth.
By the way, the title is pretty attractive and full of good thoughts. Keep writing.
Live well. 🙂

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Aaj ham aadhunik nahi ban rahe balki aadhunik banne kaa ghatak prayas kar rahe hain…..jab ham apnaa pahchaan hi kho denge waisaa aadhunik kis kaam ka……bahut badhiya post.

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